ये पैसा भी अजीब चीज़ है यारों,
कभी रुलाता है कभी हँसाता है।
बेईमानों को छोड़ हमेशा,,
ये शरीफ़ों को ही फंसाता है।।
एक दिन कहा मैंने,
हज़ार के एक नोट से।
तंग आ चुकी हूँ अब मै ,,
तेरी दी हर चोट से।।
अभी तक अकड़कर बैठा था,
अचानक उसने मुँह खोला
चुप कर जा एकांकी माता,,
मुँह बिचकाकर गुस्से में बोला।।
मुझसे नाराज़ क्यों होती है,
मैंने तेरा क्या बिगाड़ा है।
तुझे क्या मालूम ऐ ज़ालिम,,
ज़माने ने मुझे कितना लताड़ा है।।
तुझे क्या लगता है,
मेरा बहुत बोलबाला है।
अरे ऐश तो उसकी है,,
जिसने किया मेरा मुँह काला है। .
ये क्या बोलते हो तुम मियां
पल भर में मेरी चुप्पी टूटी।
वो बोला तुम ना समझोगी,
क्यूँकि तुम भी अब बन चुकी हो झूठी।
ऐसा आरोप लगाया उसने,
कि मुझसे चुप ना रहा गया।
तेहा में आकर पूँछा मैंने,,
तेरा धर्म ईमान सब कहाँ गया।।
ईमान की क्या बात करूँ,
मैं तो हूँ इस जग से हारा।
मेरी ख़ातिर एक भाई ने,
दूजे भाई को जान से मारा।।
टू जी, थ्री जी, आदर्श घोटाला ,
कॉमनवेल्थ और कोयला काण्ड।
मेरी चाहत में पड़ने वालों,,
नष्ट कर दोगे तुम ये ब्रह्माण्ड।।
क़ैद हुआ तिजोरियों में मैं,
छुपा दिया गया पलंग के नीचे।
सहम जाता हूँ मैं भी तब जब,,
लोग दौड़ते हैं मेरे आगे पीछे।।
धोखा-फ़रेब करते हैं ये पर,
रुस्वा होता है मेरा नाम।
जितनी नहीं है इज़्ज़त मेरी,,
उससे ज़्यादा हूँ मैं बदनाम।।
उससे ज़्यादा हूँ मैं बदनाम।।
कभी रुलाता है कभी हँसाता है।
बेईमानों को छोड़ हमेशा,,
ये शरीफ़ों को ही फंसाता है।।
एक दिन कहा मैंने,
हज़ार के एक नोट से।
तंग आ चुकी हूँ अब मै ,,
तेरी दी हर चोट से।।
अभी तक अकड़कर बैठा था,
अचानक उसने मुँह खोला
चुप कर जा एकांकी माता,,
मुँह बिचकाकर गुस्से में बोला।।
मुझसे नाराज़ क्यों होती है,
मैंने तेरा क्या बिगाड़ा है।
तुझे क्या मालूम ऐ ज़ालिम,,
ज़माने ने मुझे कितना लताड़ा है।।
तुझे क्या लगता है,
मेरा बहुत बोलबाला है।
अरे ऐश तो उसकी है,,
जिसने किया मेरा मुँह काला है। .
ये क्या बोलते हो तुम मियां
पल भर में मेरी चुप्पी टूटी।
वो बोला तुम ना समझोगी,
क्यूँकि तुम भी अब बन चुकी हो झूठी।
ऐसा आरोप लगाया उसने,
कि मुझसे चुप ना रहा गया।
तेहा में आकर पूँछा मैंने,,
तेरा धर्म ईमान सब कहाँ गया।।
ईमान की क्या बात करूँ,
मैं तो हूँ इस जग से हारा।
मेरी ख़ातिर एक भाई ने,
दूजे भाई को जान से मारा।।
टू जी, थ्री जी, आदर्श घोटाला ,
कॉमनवेल्थ और कोयला काण्ड।
मेरी चाहत में पड़ने वालों,,
नष्ट कर दोगे तुम ये ब्रह्माण्ड।।
क़ैद हुआ तिजोरियों में मैं,
छुपा दिया गया पलंग के नीचे।
सहम जाता हूँ मैं भी तब जब,,
लोग दौड़ते हैं मेरे आगे पीछे।।
धोखा-फ़रेब करते हैं ये पर,
रुस्वा होता है मेरा नाम।
जितनी नहीं है इज़्ज़त मेरी,,
उससे ज़्यादा हूँ मैं बदनाम।।
उससे ज़्यादा हूँ मैं बदनाम।।
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