वाह री सरकार,
तेरी जय - जयकार।
वाह री मनमोहन सरकार,,
तेरी जय जयकार।।
लोकसभा चुनाव का,
तुझे चढ़ा था बुख़ार।
हर सीट पर जीतने को,,
तू थी बड़ी बेक़रार।।
भ्रष्टाचार का ऐसा,
तूने अम्बार लगाया।
मदाताओं को जिसने ,,
खून के आंसू रुलाया ।।
और जादू की छड़ी तो,
तूने ऐसी घुमायी।
घोटालों से कर दी,,
इस देश की सफाई।।
मंत्रीमंडल भी तेरा,
था बहुत ही प्यारा।
हर सभा में फोड़ देता था,,
गुजरात मॉडल का गुब्बारा।।
इसी मंडल का हिस्सा थे,
माननीय श्री प्रधानमन्त्री हमारे।
दस साल राज किया पर,,
कभी कुछ बोले नहीं बेचारे।।
आज खाली पड़ी है उनकी कुर्सी,
किसी नए वज़ीर-ए-आज़म के इंतज़ार में।
राज करेगा देश पर अब वो,,
जनता जिसे लायी है.……
इस सत्ता के बाजार में।।
तेरी जय - जयकार।
वाह री मनमोहन सरकार,,
तेरी जय जयकार।।
लोकसभा चुनाव का,
तुझे चढ़ा था बुख़ार।
हर सीट पर जीतने को,,
तू थी बड़ी बेक़रार।।
भ्रष्टाचार का ऐसा,
तूने अम्बार लगाया।
मदाताओं को जिसने ,,
खून के आंसू रुलाया ।।
और जादू की छड़ी तो,
तूने ऐसी घुमायी।
घोटालों से कर दी,,
इस देश की सफाई।।
मंत्रीमंडल भी तेरा,
था बहुत ही प्यारा।
हर सभा में फोड़ देता था,,
गुजरात मॉडल का गुब्बारा।।
इसी मंडल का हिस्सा थे,
माननीय श्री प्रधानमन्त्री हमारे।
दस साल राज किया पर,,
कभी कुछ बोले नहीं बेचारे।।
आज खाली पड़ी है उनकी कुर्सी,
किसी नए वज़ीर-ए-आज़म के इंतज़ार में।
राज करेगा देश पर अब वो,,
जनता जिसे लायी है.……
इस सत्ता के बाजार में।।
Nice one
ReplyDeleteThank you!! :) :)
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