सुना है कि पैसा कमाने की चाहत रखने वाले दिन-रात मेहनत करते हैं, इतनी कि उन्हें दिन और रात देखना ही नसीब नहीं होता। शायद वे समझते नहीं हैं कि वक़्त क्या होता है, या हो सकता है कि व्यावहारिक तौर पर वक़्त की क़ीमत उनसे ज़्यादा और कोई नहीं समझता।
इसमें कोई शक़ नहीं कि सालों तक बड़ी-बड़ी इमारतों में शानदार सेट-अप में काम करने वाले लोग बहुत अनुभवी होते हैं। ऐसा मेरी समझ समझती है। ऐसे लोगों को देख ऐसा लगता है, मानो जीना ही भूल गए हैं। उनकी ज़िन्दगी उनकी अपनी नहीं है। जो नहीं चाहते, वही करते चले जा रहे हैं। भागती ज़िन्दगी के साथ कदम मिलाने की कोशिश तो कर रहे हैं, पर शायद पिछड़ते ही जा रहे हैं। भागने का भी कोई ख़ास फायदा नहीं नहीं हो रहा है। दौड़ लगाते-लगाते हाँफने लगे हैं। इतने व्यस्त हो गए हैं कि भूल जाते हैं कि दिन में एक बार मुस्कुरा लेने से वो थकान, घुटन और चिड़चिड़ापन ख़त्म हो जाएगा। कुछ पल के लिए ही सही, पर गर्व महसूस होगा, इस बात का कि आज हमने एक हँसी हंसी।
ऐसा कहना ग़लत होगा कि वे हँसने से वंचित ही हो चुके हैं। हल्की-सी मुस्कान की झलक तो दिखेगी उन चेहरों पर, मगर वो मात्र किसी का उपहास उड़ा लेने भर को होगी। यह भी एक ज़रूरी हिस्सा है उन लोगों के जीवन का, जो खुद के लिए हँस नहीं पाते।
पर इतना कर पाने की फुरसत हर दिन तो नहीं मिलती। ये बात हम और आप नहीं समझ सकते। उनकी जगह होते, उस दौर में जिए होते, तो एहसास होता कि वे क्या झेल रहे हैं। उनकी तरसती आँखों के पीछे क्या सच्चाई छिपी है, ये जानना आसान नहीं और शायद जानने की ज़रुरत भी नहीं, क्यूँकि वो आपको कुछ नहीं बताएँगे। आपको समझना चाहिये कि जिन लोगों के पास मुस्कुराने का समय नहीं है, वो आपको अपनी कहानी कैसे सुनाएंगे।
मगर सच सिर्फ एक ही है, और वो है "पैसा"। इसके बिना कोई नहीं जी सकता। हम, आप, और वो सभी लोग जो अपनी खोयी हुई मुस्कान से परेशान तो हैं, मग़र हो सकता है कि उसे ढूंढने की कोशिश नहीं कर रहे। न ही अब उसे वापस पाना चाहते हैं। जो जैसा चल रहा है, उसी को अपनी ख़ुशी मान बैठे हैं, संतुष्ट हैं और उसे स्वीकार करते जा रहे हैं। परिवर्तन की उम्मीद रखते होंगे शायद, लकिन कुछ कर पाने में असमर्थ हैं।
ख़ैर, कोई बात नहीं। पैसा कमाना ज़रूरी है, लेकिन आय की चाहत में खुद को मत खोइए। आजकल लोग एक-दूसरे को जानवर से भी बत्तर बताने लगे हैं। ये ठीक नहीं है। चीज़ों को स्वीकार करना सही है, मगर ग़लत की आदत डाल लेना और वही चीज़ आगे आने वाली पीढ़ी को सिखाना अमान्य है।
आप अपने जैसे ही रहिये, क्यूँकि अगर आप "आप" ना रहे, तो उस आमदनी और अनुभव का क्या होगा जो आपने इतने साल जी कर कमाया है। कृप्या हँसिये, उपहास उड़ाने के लिए नहीं, बल्कि खुद को खुश रखने के लिए। उस कागज़ के टुकड़े को, जो आपने दिन-रात एक कर के कमाया है, रद्दी न बनाइये।