Friday, 30 May 2014

आज दिन कुछ मेहरबान था

आज दिन कुछ मेहरबान था,
ख़ुशियों का जैसे मुझ पर कोई एहसान था।
इन्हें समेट लूँ मैं अपनी आग़ोश में,,
कहीं हो न जाऊं इसी पल मधहोश मैं।।

न जाने कैसा हँसी का सैलाब है,
मुझे जीवन अपना लगता कोई ख़्वाब है।
हक़ीक़त इतनी हँसीं होगी मैंने सोचा न था,,
सपनों से भी ये सवाल कभी पूंछा न था।।

पर सपनों से भी ख़ूबसूरत ये हक़ीक़त मुझको लगती है,
क्यों कहते हैं वो कि ये अक्सर हमको ठगती है।
कुछ तो है जो ख़ुदा ने सिर्फ मुझे नवाज़ा है,,
क़िस्मतों को रचने वाला वही तो एक राजा है। .

इन दोस्तों का साथ ही अब मेरी मुस्कान है,
इनकी दुआओं में बस्ती मेरी जान है।
ख़्वाहिश है बस इतनी कि ये हर पल पास रहे ,,
दिल के क़रीब और एहसासों में ख़ास रहें। .

क्या जाने ये क़िस्मत कहाँ ले जायेगी,
उम्मीद है कि ये अभी और भी खुशियाँ लाएगी।
यूँही इन उम्मीदों का सिलसिला चलता रहे,
और आशाओं भरा हर सपना इन आँखों में पलता रहे। .




Friday, 23 May 2014

व्यथा हज़ार के नोट की

ये पैसा भी अजीब चीज़ है यारों,
कभी रुलाता है कभी हँसाता है।
बेईमानों को छोड़ हमेशा,,
ये शरीफ़ों को ही फंसाता है।।

एक दिन कहा मैंने,
हज़ार के एक नोट से।
तंग आ चुकी हूँ अब मै ,,
तेरी दी हर चोट से।।

अभी तक अकड़कर बैठा था,
अचानक उसने मुँह खोला
चुप कर जा एकांकी माता,,
मुँह बिचकाकर गुस्से में बोला।।

मुझसे नाराज़ क्यों होती है,
मैंने तेरा क्या बिगाड़ा है।
तुझे क्या मालूम ऐ ज़ालिम,,
ज़माने ने मुझे कितना लताड़ा है।।

तुझे क्या लगता है,
मेरा बहुत बोलबाला है।
अरे ऐश तो उसकी है,,
जिसने किया मेरा मुँह काला है। .

ये क्या बोलते हो तुम मियां
पल भर में मेरी चुप्पी टूटी।
वो बोला तुम  ना समझोगी,
क्यूँकि तुम भी अब बन चुकी हो झूठी।

ऐसा आरोप लगाया उसने,
कि मुझसे चुप ना रहा गया।
तेहा में आकर पूँछा मैंने,,
तेरा धर्म ईमान सब कहाँ गया।।

ईमान की क्या बात करूँ,
मैं तो हूँ इस जग से हारा।
मेरी ख़ातिर एक भाई ने,
दूजे भाई को जान से मारा।।

टू जी, थ्री जी, आदर्श घोटाला ,
कॉमनवेल्थ और कोयला काण्ड।
मेरी चाहत में पड़ने वालों,,
नष्ट कर दोगे तुम ये ब्रह्माण्ड।।

क़ैद हुआ तिजोरियों में मैं,
छुपा दिया गया पलंग के नीचे।
सहम जाता हूँ मैं भी तब जब,,
लोग दौड़ते हैं मेरे आगे पीछे।।

धोखा-फ़रेब करते हैं ये पर,
रुस्वा होता है मेरा नाम।
जितनी नहीं है इज़्ज़त मेरी,,
उससे ज़्यादा हूँ मैं बदनाम।।
उससे ज़्यादा हूँ मैं बदनाम।।




Sunday, 18 May 2014

ये तो होना ही था !!!

16 मई 2014 लोक सभा चुनाव का परिणाम लेकर आयी।  भारत के लिए एक और ऐतिहासिक दिन बन चुका है ये अब। बीजेपी बहुमत के साथ जीती और कांग्रेस को मिल गया बाबा जी का ठुल्लु। अन्य पार्टियाँ भी कुछ न कुछ करती हुई दिखाई दीं। सब कह रहे हैं कि कई सालों बाद ऐसा मंज़र देखने को मिला है जब कोई पार्टी बहुमत से जीती है। ख़ैर, अच्छी बात है जीती है तो। मुबारक हो भई आपको। पर यह चमत्कार हुआ कैसे ? कोई आंकलन, विश्लेषण या अनुसंधान है किसी के पास ? यह अचानक नहीं हुआ बल्कि ये तो तय था।  शायद एग्जिट पोल के आने से भी पहले से।

चुनाव के समय या मतदान से पहले जो सबसे ज़्यादा महत्त्व रखता है वो है "चुनाव प्रचार"। अगर ये न हो तो चुनाव चुनाव ही नहीं लगता। खूब ढोल-बाजे साथ लेकर जब नेता अपने कार्यकर्ताओं के साथ गाड़ी में बैठकर लोगों के बीच जाता है, उनकी एक-आद समस्या सुनता है और आश्वासन दिलाते हुए ये कहता है कि आप हमें वोट दीजिये, आपकी हर समस्या दूर होगी और हम आपके इलाके में विकास करेंगे, तब लगता है कि चुनाव अपनी चरम सीमा पर है।  ऐसे ही तो राजीतिक बयार बनाई जाती है।

ट्विंकल-ट्विंकल लिटिल स्टार, अबकी बार मोदी सरकार। नहीं होगा स्त्रियों पर अब अत्याचार, अबकी बार मोदी सरकार। हर-हर मोदी, घर-घर मोदी। दिल्ली मेट्रो, ऑटो रिक्शा, गलियों में मोदी जी की बड़ी सी तस्वीर लिए बड़े-बड़े होर्डिंग्स, सीरियल के बीच में ही न्यूज़ चैनेल जैसा चलता एक टिकर  जिसमे बड़े-बड़े शब्दों में लिखा है "अबकी बार मोदी सरकार" इस राजनीतिक बयार को हवा देता है। साथ ही अनगिनत रोडशो भी इस प्रचार का अहम हिस्सा थे। यह तो मानना पड़ेगा कि मोदी जी ने इस बार चुनाव प्रचार में कोई कमी नहीं छोड़ी। शायद ही कोई चैनल या अखबार होगा, जिसमे उनका इंटरव्यू न दिखाई दिया हो।  सालों पहले जो मोदी करन थापर का इंटरव्यू छोड़कर चले गए थे, उन्होंने इस लोक सभा चुनाव में जीतने के लिए जी-जान से इंटरव्यू दिए।  कुछ चैनलों पर तो ये इंटरव्यू रिपीट भी होते रहे।  नरेंद्र मोदी का एक्सक्लूसिव इंटरव्यू, देखिये सिर्फ फलाना चैनल पर।

सोशल मीडिया पर जैसे मोदी के नाम की बाढ़ आ गयी। हर दिन हज़ारों अपडेट सिर्फ मोदी के नाम के। कुछ लोग तो मोदी के प्यार में इस क़दर अंधे हो गए थे कि उन्हें हर जगह मोदी ही दिखते थे, अभी भी दिखते हैं। जो भी पोस्ट दिखा, नीचे कमेंट कर दिया "जय मोदी की", भले ही उसका राजनीती से दूर-दूर तक कोई लेना-देना ना हो।  फेसबुक, ट्विटर, जीमेल और फलाना ढिमका नेटवर्किंग साइट्स पे उनका जलवा बिखरा हुआ था। इसके अलावा घर-घर फ़ोन जाना और उसमें से एक आवाज़ का कहना "अबकी बार, मोदी सरकार"। ये सब जताते थे कि परिणाम क्या होंगे।  इस बार मतदान प्रतिशत भी बढ़ा।  लोगों पर इस प्रचार का प्रभाव ज़्यादा ई हो गया शायद, ऐसा इन नतीजों को देखकर लगता है। मज़ाक में ही सही पर हर किसी की ज़बान पर "अबकी बार, मोदी सरकार" बैठा दिखता था। हर जगह बस मोदी, मोदी, मोदी।  तो आख़िर क्यों न समझा जाए कि नतीजे जो आये हैं, यही अपेक्षित थे? क्यों लोगों को ख़ुशी या अचम्भा ह रहा है?

ख़ैर,  क्यूंकि अब नतीजा आ गया है तो मोदी जी का प्रधानमन्त्री बनना भी तय है।  उम्मीद है कि वो श्री मनमोहन सिंह जी से बेहतर साबित हों।  10 साल के उनके राज में पता नहीं वो खुद को कभी प्रधानमन्त्री महसूस कर भी पाये थे या नहीं।  कभी - कभी बोलते थे तो अच्छा लगता था। पर उसमें भी लगता था कि शायद अपने दिल की बात नहीं कह पा रहे।  किसी ने कुछ लिखकर दे दिया है, बस वही पढ़ते चले जा रहे हैं।कल आखरी बार उनको दूरदर्शन पर बोलते हुए देखा। हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों भाषाओं में कल आखरी बार बतौर प्रधानमन्त्री उन्होंने देश को एड्रेस किया। आजतक वो जब भी बोलते थे, उसे कभी गंभीरता से नहीं लिया। कल इस बात का एहसास हुआ, जब दूरदर्शन पर वो ऐसे बोल रहे थे मानो टैलिप्राम्प्टर से कोई न्यूज़ पढ़ रहा हो। जैसे टैलिप्राम्प्टर पर न्यूज़ चलती रहती है और एंकर पढ़ता रहता है, मंत्री जी भी कुछ ऐसे ही भागने की होड़ में थे। बिना पलकें झपकाये बस बोलते चले जा रहे थे।  पता नहीं अंदाजा सही है या ग़लत।

मोदी जी से इल्तेजा है कि वे इस पद की लाज रखें। कांग्रेस को हमेशा कोसा तो करते थे, पर ख़ुद कितने सक्षम होंगे देश चलाने में, ये तो आने वाले वक़्त में तय हो ही जाएगा।  गुजरात का विकास अपनी जगह ठीक है पर ये जो चुनावी प्रचार का बोलबाला 300 का आंकड़ा पार कर गया है, इसकी लाज रखना भी तो उनका धर्म एवं कर्तव्य है।   


Saturday, 17 May 2014

वाह री सरकार!!

वाह री सरकार,
तेरी जय - जयकार।
वाह री मनमोहन सरकार,,
तेरी जय जयकार।।

लोकसभा चुनाव का,
तुझे चढ़ा था बुख़ार।
हर सीट पर जीतने को,,
तू थी बड़ी बेक़रार।।

भ्रष्टाचार का ऐसा,
तूने अम्बार लगाया।
मदाताओं को जिसने ,,
खून के आंसू रुलाया ।।

और जादू की छड़ी तो,
तूने ऐसी घुमायी।
घोटालों से कर दी,,
इस देश की सफाई।।

मंत्रीमंडल भी तेरा,
था बहुत ही प्यारा।
हर सभा में फोड़ देता था,,
गुजरात मॉडल का गुब्बारा।।

इसी मंडल का हिस्सा थे,
माननीय श्री प्रधानमन्त्री हमारे।
दस साल राज किया पर,,
कभी कुछ बोले नहीं बेचारे।।

आज खाली पड़ी है उनकी कुर्सी,
किसी नए वज़ीर-ए-आज़म के इंतज़ार में।
राज करेगा देश पर अब वो,,
जनता जिसे लायी है.……
इस सत्ता के बाजार में।।


Monday, 5 May 2014

आप अकेले नहीं थे।

पांच साल पहले आपसे  मुलाक़ात हुई थी, आप भी हमारे मेंटर थे।  केमिस्ट्री के एटम-मोलेक्युल्स की जो कहानी आप सुनाते थे, शायद कोई नहीं सुना सकता था।  मेरा पहला लेख जो इतना लोकप्रिय हुआ, वो आप ही के लिये लिखा गया था।  तब उतना अनुभव नहीं था, पर अपने सभी दोस्तों में सिर्फ़ मै ही थी जिसे लिखने का बहुत शौंक था। एक अनुभव आपसे मिला तो उसे पन्ने पर उतार दिया। आज फिर एक अनुभव से गुज़री तो दिल किया जज़्बातों को शब्दोँ में पिरोने का।

मानो आप में और उनमें कोइ फ़र्क़ हीं नहीं है। उन  एटम और मॉलिक्यूल की जीवनी समझ आने ही लगी थी कि अचानक एक दिन आपने कक्षा में  कहा कि आज मेरा आख़री दिन है तुम लोगों के साथ। क्यूंकि यह वाक्य बोलने के बाद आप मुस्कुराने लगे तो हम सबको लगा कि आप मज़ाक कर रहे हैं, बच्चे ही तो थे हम तब जो आपकी बातों में आ गये।  पर एक हफ्ते बाद जब कक्षा में नया टीचर आया तो समझ में आया कि वो मज़ाक नहीं था। आप सचमुच हमें छोड़ कर जा चुके थे, किसी दूसरे शहर में, किसी ओर को उन्हीं एटम ओर मॉलिक्यूल का ज्ञान बांटने।

ख़ैर, आज ऐसा  लगा कि आप अकेले नहीं थे हमें यह अनुभव देने वाले। कोई और भी शामिल हुआ आज इस श्रेणी में।  एक और मेंटर हमें छोड़ गया।  आप ही की तरह उनकी भी कुछ मजबूरियाँ थीं। लेकिन आज होने वाले इस अनुभव ने न जाने क्यों आपकी भी याद दिला दी।  आपके जाने के बाद लगने लगा था कि आप जैसा क़ोई शख़्स फ़िर कभी नहीं मिलेगा, क्यूंकि वैसा क़ोई होगा ही नहीं शायद इस दुनिया में । पर मेरा अंदाज़ा ग़लत था।

आप जैसा एक शख्स और है जिनके बारे में कल वव्हॉट्स एप्प पर बातें हो रहीं थीं कि सर जा रहे हैं।  कुछ समझ नहीं आ रहा था कि सब लोग ऐसा क्यों बोल रहे हैं। दिल को बिल्कुल वैसा ही झटका लगा जैसा आपके जाने से लगा था। एक शख्स जिसके भरोसे हम सब कुछ करते आ रहे थे, एक शख्स जिसने हुमें इतना कुछ सिखाया, एक शख्स जिस पर हम शायद पूरी तरह से निर्भर थे, एक शख्स जिस पर हम भरोसा करते थे, एक शख्स जो हमारी एकता का प्रतीक था; वो अचानक हमें छोड़ कर जा रहा था। बुरा लग रहा था पर कहते हैं ना वक़्त सब कुछ सहने की शक्ति देता है।  साथ में रहने वाले दोस्तों के रूप में हिम्मत भी देता है।  एक दोस्त ने कहा था -"लाइफ प्लान्स अकोर्डिंगली, ऑल्वेज़ विध अ रीज़न'। अब देखते हैं क्या प्लान किया है ज़िन्दगी ने और कहाँ है अपनी मंज़िल। पांच साल हो गए पर आपसे मुलाक़ात नहीं हुई, उम्मीद है कि इस नये शख्स का साथ कभी नहीं छूटेगा।

मग़र सौ बात की एक बात- 'वी विल मिस यू सर'। गॉड ब्लेस यू।