Friday, 29 April 2016

विश्वास!

'रिश्ते'- सुनने में यह शब्द छोटा लगता है पर इसका भार बहुत होता है। जिस पल हम माँ की कोख छोड़कर इस दुनिया का दीदार करते हैं, हज़ारों रिश्ते हमसे जुड़ जाते हैं। पिता, भाई, बहन, दोस्त, चाचा, मामी, ताई, मौसी और न जाने कौन- कौन। जैसे-जैसे हम बड़े होते जाते हैं, हमें इन रिश्तों की अहमियत समझाई जाती है। हम उन रिश्तों को जीने-निभाने लगते हैं क्यूँकि हमें वही सिखाया जाता है।

कुछ वक़्त बाद ये होता है कि हम होश सँभालने लगते हैं और समझ बढ़ने लगती है। हम रिश्तों को अपनी नज़र से भांपना शुरू कर देते हैं। कदम घर के बाहर पड़ते हैं तो हज़ारों अजनबी राह में टकरा जाया करते हैं। कुछ तो आकर जाने के लिए होते हैं तो वहीँ कुछ से जीवन भर का रिश्ता जुड़ जाता है।

इन्हीं अजनबियों में एक शख़्स से मुलाक़ात हुई जिनका नाम है 'विश्वास'। हम एक दफ़्तर में काम किया करते थे। हमारी पहली मुलाक़ात के बारे में मुझे सब कुछ याद नहीं, मग़र इतना ज़रूर याद है कि उन्होनें पत्रकारिता को लेकर मुझमें बहुत हौंसला जगाया था। मेरा आत्मविश्वास जो हर दिन बस घटता जा रहा था, उसे वापिस लाने में उन्होंने मेरी मदद की। दफ्तर में जब आये थे, तो उन्हें मेरी ही टीम में रखा गया था। ज़रा सी भी परेशानी होती थी उन्हें तो "एकांकी ये बताना, ज़रा आओ तो, सुनो; अच्छा एकांकी ये बताना ये कैसे होगा; एकांकी, देखना ज़रा ये न्यूज़ अपलोड नहीं हो रही है, देखो क्या प्रॉब्लम है; अच्छा एकांकी तुमने वो ट्रांसक्रिप्शन कर दिया, वो कर दो यार ज़रा।" हर वक़्त बस एक ही सहारा था उनका, एकांकी। और एकांकी को भी उनका साथ देना ही था। वजह स्पष्ट थी।

लोग अक्सर कहा करते हैं कि मैं बहुत बड़ी-बड़ी बेवजह की बातें किया करती हूँ, बिग ब्रदर को भी कभी-कभी ऐसा लगता है पर कहीं-न-कहीं उन्हें ये यकीं है कि उनकी छोटी बहना ज़रूर क़ामयाब होगी। कभी अगर ऐसा कोई दिन आएगा तो मुझे ये भरोसा है कि मेरे लिए दुआ करने वालों में एक नाम उनका भी ज़रूर शुमार होगा। बिना "विश्वास" के कोई जीवन में आगे कैसे बढ़ सकता है।

विश्वास के बारे में ख़ास बात ये है कि वो अपने नाम की गुणवत्ता को हमेशा क़ायम रखते हैं। वो कभी किसी का विश्वास नहीं तोड़ते। ख़ैर, मेरा तो अब तक नहीं तोडा, बाकियों से भी ऐसा ही सुनने को मिलेगा, ऐसी मुझे उम्मीद है। वैसे जो शख़्स दूसरों में जीने और अपने ख़्वाबों को पूरा करने की उम्मीद जगाये, उन्हें हौंसला दे, वो कभी किसी के साथ बुरा भी कर सकता है, ये ख्याल दिल को रास नहीं आता। यहाँ तक कि उस शख़्स के साथ भी कभी कुछ ग़लत नहीं हो सकता।

विश्वास का आत्मविश्वास ज़िंदा रहना ज़रूरी है। अल्लाह की उन पर रहमत ज़रूर होगी।

बिग ब्रदर के साथ मेरी पहली सेल्फी।