Monday, 30 October 2017

प्यार

प्यार - एक छोटा-सा शब्द जो इंसान के जीवन की नींव है। इस शब्द के कई प्रकार हैं, ये आप लोगों के लिए कोई नयी बात नहीं होगी। सबसे पहले आता है माँ-बाप का प्यार, फिर भाई-बहन का, दोस्तों का, गुरु का, रिश्तेदारों का और जीवन में आने वाले न जाने किन-किन लोगों का। इन सबके अलावा एक और प्यार होता है जिसे हम तहज़ीब की भाषा में "इश्क़" कहते हैं। इससे भी आप सभी परिचित ही होंगे।

मगर आजकल के जिस दौर में हम 'इंसान' जी रहे हैं, उसमें इस प्यार के कुछ नए, अपग्रेडेड और इनोवेटिव रूप जुड़ गए हैं। उदाहरण के लिए सोशल मीडिया का प्यार, अपने मुंह मियाँ मिट्ठू प्यार, फॉर्मल्टी वाला प्यार, जिस्मानी प्यार, दिखावे वाला प्यार और सबसे दिलचस्प "हम तुमसे बहुत प्यार करते हैं" वाला प्यार।

ख़ुदा ने इस जहाँ में कुछ ऐसी शख़्सियतें भी बनायीं हैं जो जब भी किसी से प्यार करती हैं तो दुनिया भुला देती हैं। ये प्यार की वो श्रेणी है जिसमें प्यार का छल, कपट या स्वार्थ से किसी भी तरह का कोई भी वासता नहीं होता। उनके लिए प्यार सिर्फ प्यार होता है। दे आर सेल्फलेस सोल्स जिनके लिए प्यार का मतलब सिर्फ अपनों को ख़ुश देखना होता है। किसी को दिल से प्यार करने की इस पूरी प्रक्रिया में अगर कोई उनको "फॉर ग्रांटेड" भी ले ले तो भी उन्हें कोई ख़ास फ़र्क़ नहीं पड़ता क्योंकि वो साहसी होते हैं, कपट की घिनौनी दुनिया से बहुत ही दूर।

आज का ये दौर जहाँ अक्सर रिश्तों में प्यार सिर्फ़ अपना उल्लू सीधा करने तक सीमित रह गया है, या जहाँ इश्क़ की परिभाषा फ़्लर्टिंग में सिमट गई है -- यहाँ कुछ ऐसे लोग भी हैं जो इस सबसे परे हटकर प्यार जताना जानते हैं, अपनापन साबित करना जानते हैं, ये यक़ीन दिलाना जानते हैं कि उनके लिए प्यार सिर्फ़ प्यार है न कि किसी के कंधे पर बन्दूक रख कर अपने स्वार्थों को पूरा करने का कोई ज़रिया।

"हम तुमसे बहुत प्यार करते हैं" वाले लोगों के लिए ये प्यार महज़ दूसरों का मज़ाक बनाने और अपना एंटरटेनमेंट करने का एक तरीक़ा होता है। उन्हें इस प्यार पर अट्टाहस करने की इस क़दर आदत हो जाती है कि वो भूल जाते हैं कि एक इंसान के जीवन में सच्चा महत्त्व रखने वाले इस ढाई अक्षर के शब्द की बेक़दरी करने में उन्हें सिर्फ़ ढाई मिनट लगे हैं।

किसी और के कन्धों का सहारा लेने वाले बुज़दिल होते हैं। जो साहसी होते हैं वो अपनी बात कहने का दम ख़ुद रखते हैं। अफ़सोस कि निशाना भी उन्हीं कन्धों को बनाया जाता है जिनमें बग़ावत करने का हौंसला होता है। क्योंकि जो बाग़ी होते हैं, वही सच्ची मोहब्बत करते हैं।

टेक्नोलॉजी और बिना अक्ल के की जाने वाली नकल ने भी प्यार शब्द की धज्जियां उड़ाने में क़ाफी योगदान दिया है। सोशल नेटवर्किंग, दिन-रात की चैटिंग, ऑनलाइन डेटिंग, सेक्सटिंग एंड मच मोर -- इन सब प्यार के दिखावों में लोग असली जज़्बातों को महसूस करना तो अक़्सर भूल ही जाते हैं।

दिल से इश्क़ करने वाले समझते हैं कि सामने वाले के प्यार में कितनी शिद्दत है, पर उस सामने वाले के जज़्बातों में समानता का क्या स्तर है, ये आभासी दुनिया कभी नहीं बता सकती।

प्यार को मज़ाक समझने वाले, उसे बेज़ार करने वाले काफ़ी हद तक सफल लोग हैं। उनकी उपलब्धि और ख़ुशनसीबी है कि उनकी वजह से ही दिखावे वाला प्यार आजकल हैशटैग के साथ धड़ल्ले से ट्रेंड कर रहा है।

इस प्यार को अब ट्रोल कराने की ज़रूरत है और इसकोट्रोल सिर्फ़ वही करा सकते हैं जो हक़ीक़त में भी मोहब्बत को बिना किसी विशेष टैग के सिर्फ मोहब्बत ही समझते हैं और उसे साफ़ नीयत से जताना, निभाना और अपना बनाना जानते हैं।

दौर चाहें जो भी हो, ये याद रखा जाना चाहिए कि जब किसी साफ़ मन शख़्सियत के प्यार को बिना वजह ग़लत वजह के लिए 'इस्तेमाल' किया जाता है तो उसके प्यार को नफ़रत बनने में केवल एक लम्हा लगता है। और जब कोई बेइंतेहा मोहब्बत करने वाला नफ़रत करता है तो उसका असर दिलों में शरीर को धीरे-धीरे मार देने वाले ज़हर से भी बत्तर होता है।