Wednesday, 9 December 2015

अ नशेड़ी इन नोएडा

कल्पना कीजिये कि हर रोज़ की तरह आप किसी रिक्शे पर बैठकर दफ़्तर जा रहे हैं और रास्ते में अचानक एक छह फुट का लम्बा-चौड़ा आदमी रिक्शे को धक्का देकर चौराहे पर गिरा दे, क्या समझेंगे आप? क्या ख्याल दौड़ेगा आपके दिमाग में? दौड़ेगा भी या नहीं? सोचिये।

नॉएडा के सेक्टर-६२ में स्थित मशहूर फोर्टिस अस्पताल के पास बने चौराहे पर एक आदमी ने आज ऐसा ही किया। रिक्शे पर बैठी मैं उम्मीद लगा रही थी कि दफ़्तर जल्दी पहुँच जाऊंगी, मग़र दिल को बहलाने के लिए बस ये ख्याल ही अच्छा था। असल में उस वक़्त चौराहे पर जाम बहुत ज़्यादा था । वो रिक्शा चालक और मैं दोनों जाम खुलने की  राह देख रहे थे। एकाएक ये नशे में धुत्त शख़्स सूट - बूट पहने आया और इसने हमारा रिक्शा पलट दिया।

कुछ पल तक समझ में ही नहीं आया कि आख़िर ये हुआ क्या? रिक्शा चालक और मैं दोनों सही-सलामत थे। न जाने क्या पुण्य किये थे हम दोनों ने। मन तो कर रहा था कि सूट वाले भाईसाहब के कान के नीचे दो धर दिए जाएँ, लेकिन कम्बख़त का साइज इतना बड़ा था कि वहां तक हाथ ही नहीं पहुँचता शायद। अचानक वो भाईसाहब हाथ जोड़ कर मुझसे माफ़ी माँगते हुए बोले, "मैडम, आपको परेशान करने का इरादा नहीं था मेरा।" अब जब इनका मुँह खुला तो पता चला कि ये महाराज न जाने कितनी बोतलें उड़ेलकर इस चौराहे पर नुक्कड़ नाटक खेल रहे हैं। आते-जाते लोगों को बिना वजह मार रहे हैं या गालियाँ दिए चले जा रहे हैं।

जी तो कर रहा था कि डंडे से इ  महान आत्मा की धुलाई कर दी जाए मगर ना तो इतना समय था और ना ही इस प्रक्रिया में कोई सभ्यता मालूम होती थी।

मैंने तुरंत १०० नंबर डायल किया। पीसीआर ने जवाब दिया, "हमारे पास पहले भी दो बार शिकायत आ चुकी है।" सवाल था कि ऐक्शन कब लिया जायेगा? लेकिन सवाल-जवाब करने का मौका नहीं मिला, दफ्तर के लिए देर जो हो रही थी।

जाम में फँसे हुए पूरे बीस मिनट बीत चुके थे। ना पीसीआर आई और ना ही किसी नागरिक ने कोई एक्शन ले पाया। चारों तरफ से लोग जाम से निकलकर बस जल्द-से-जल्द अपनी मंज़िल तक पहुंचना चाहते थे। हर किसी का ध्यान उस नशेड़ी की ओर था मग़र जल्दी भी सभी को थी। मुझे भी थी इसलिए आख़िरकार मैं रिक्शे से उतरी और पैदल ही दफ़्तर निकल गई। क्या करें, किसी नशेड़ी की वजह से कोई अपना हॉफ डे काहे लगवायेगा दफ़्तर में।

ज़हन में ये ख्याल था कि एक नशे में धुत्त इंसान के ना तो मुँह लगना चाहिए और ना ही उस पर कभी भरोसा करना चाहिए। अफ़सोस इस बात का है कि उस वक़्त मेरे फ़ोन का कैमरा काम नहीं किया वरना आपको भी 'अ नशेड़ी इन नोएडा' के दर्शन ज़रूर होते। या फिर यही ठीक ही है क्यूंकि ऐसे आदमी को भला कोई क्यों देखना चाहेगा। आप ही बताइये।

आज एक नशेड़ी मिला है कल कोई और मिल जायेगा। अजीब ही दुनिया है ये। बहरहाल आप सावधान रहें और अपना ख्याल रखें। जागरूक रहें।