Sunday, 18 May 2014

ये तो होना ही था !!!

16 मई 2014 लोक सभा चुनाव का परिणाम लेकर आयी।  भारत के लिए एक और ऐतिहासिक दिन बन चुका है ये अब। बीजेपी बहुमत के साथ जीती और कांग्रेस को मिल गया बाबा जी का ठुल्लु। अन्य पार्टियाँ भी कुछ न कुछ करती हुई दिखाई दीं। सब कह रहे हैं कि कई सालों बाद ऐसा मंज़र देखने को मिला है जब कोई पार्टी बहुमत से जीती है। ख़ैर, अच्छी बात है जीती है तो। मुबारक हो भई आपको। पर यह चमत्कार हुआ कैसे ? कोई आंकलन, विश्लेषण या अनुसंधान है किसी के पास ? यह अचानक नहीं हुआ बल्कि ये तो तय था।  शायद एग्जिट पोल के आने से भी पहले से।

चुनाव के समय या मतदान से पहले जो सबसे ज़्यादा महत्त्व रखता है वो है "चुनाव प्रचार"। अगर ये न हो तो चुनाव चुनाव ही नहीं लगता। खूब ढोल-बाजे साथ लेकर जब नेता अपने कार्यकर्ताओं के साथ गाड़ी में बैठकर लोगों के बीच जाता है, उनकी एक-आद समस्या सुनता है और आश्वासन दिलाते हुए ये कहता है कि आप हमें वोट दीजिये, आपकी हर समस्या दूर होगी और हम आपके इलाके में विकास करेंगे, तब लगता है कि चुनाव अपनी चरम सीमा पर है।  ऐसे ही तो राजीतिक बयार बनाई जाती है।

ट्विंकल-ट्विंकल लिटिल स्टार, अबकी बार मोदी सरकार। नहीं होगा स्त्रियों पर अब अत्याचार, अबकी बार मोदी सरकार। हर-हर मोदी, घर-घर मोदी। दिल्ली मेट्रो, ऑटो रिक्शा, गलियों में मोदी जी की बड़ी सी तस्वीर लिए बड़े-बड़े होर्डिंग्स, सीरियल के बीच में ही न्यूज़ चैनेल जैसा चलता एक टिकर  जिसमे बड़े-बड़े शब्दों में लिखा है "अबकी बार मोदी सरकार" इस राजनीतिक बयार को हवा देता है। साथ ही अनगिनत रोडशो भी इस प्रचार का अहम हिस्सा थे। यह तो मानना पड़ेगा कि मोदी जी ने इस बार चुनाव प्रचार में कोई कमी नहीं छोड़ी। शायद ही कोई चैनल या अखबार होगा, जिसमे उनका इंटरव्यू न दिखाई दिया हो।  सालों पहले जो मोदी करन थापर का इंटरव्यू छोड़कर चले गए थे, उन्होंने इस लोक सभा चुनाव में जीतने के लिए जी-जान से इंटरव्यू दिए।  कुछ चैनलों पर तो ये इंटरव्यू रिपीट भी होते रहे।  नरेंद्र मोदी का एक्सक्लूसिव इंटरव्यू, देखिये सिर्फ फलाना चैनल पर।

सोशल मीडिया पर जैसे मोदी के नाम की बाढ़ आ गयी। हर दिन हज़ारों अपडेट सिर्फ मोदी के नाम के। कुछ लोग तो मोदी के प्यार में इस क़दर अंधे हो गए थे कि उन्हें हर जगह मोदी ही दिखते थे, अभी भी दिखते हैं। जो भी पोस्ट दिखा, नीचे कमेंट कर दिया "जय मोदी की", भले ही उसका राजनीती से दूर-दूर तक कोई लेना-देना ना हो।  फेसबुक, ट्विटर, जीमेल और फलाना ढिमका नेटवर्किंग साइट्स पे उनका जलवा बिखरा हुआ था। इसके अलावा घर-घर फ़ोन जाना और उसमें से एक आवाज़ का कहना "अबकी बार, मोदी सरकार"। ये सब जताते थे कि परिणाम क्या होंगे।  इस बार मतदान प्रतिशत भी बढ़ा।  लोगों पर इस प्रचार का प्रभाव ज़्यादा ई हो गया शायद, ऐसा इन नतीजों को देखकर लगता है। मज़ाक में ही सही पर हर किसी की ज़बान पर "अबकी बार, मोदी सरकार" बैठा दिखता था। हर जगह बस मोदी, मोदी, मोदी।  तो आख़िर क्यों न समझा जाए कि नतीजे जो आये हैं, यही अपेक्षित थे? क्यों लोगों को ख़ुशी या अचम्भा ह रहा है?

ख़ैर,  क्यूंकि अब नतीजा आ गया है तो मोदी जी का प्रधानमन्त्री बनना भी तय है।  उम्मीद है कि वो श्री मनमोहन सिंह जी से बेहतर साबित हों।  10 साल के उनके राज में पता नहीं वो खुद को कभी प्रधानमन्त्री महसूस कर भी पाये थे या नहीं।  कभी - कभी बोलते थे तो अच्छा लगता था। पर उसमें भी लगता था कि शायद अपने दिल की बात नहीं कह पा रहे।  किसी ने कुछ लिखकर दे दिया है, बस वही पढ़ते चले जा रहे हैं।कल आखरी बार उनको दूरदर्शन पर बोलते हुए देखा। हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों भाषाओं में कल आखरी बार बतौर प्रधानमन्त्री उन्होंने देश को एड्रेस किया। आजतक वो जब भी बोलते थे, उसे कभी गंभीरता से नहीं लिया। कल इस बात का एहसास हुआ, जब दूरदर्शन पर वो ऐसे बोल रहे थे मानो टैलिप्राम्प्टर से कोई न्यूज़ पढ़ रहा हो। जैसे टैलिप्राम्प्टर पर न्यूज़ चलती रहती है और एंकर पढ़ता रहता है, मंत्री जी भी कुछ ऐसे ही भागने की होड़ में थे। बिना पलकें झपकाये बस बोलते चले जा रहे थे।  पता नहीं अंदाजा सही है या ग़लत।

मोदी जी से इल्तेजा है कि वे इस पद की लाज रखें। कांग्रेस को हमेशा कोसा तो करते थे, पर ख़ुद कितने सक्षम होंगे देश चलाने में, ये तो आने वाले वक़्त में तय हो ही जाएगा।  गुजरात का विकास अपनी जगह ठीक है पर ये जो चुनावी प्रचार का बोलबाला 300 का आंकड़ा पार कर गया है, इसकी लाज रखना भी तो उनका धर्म एवं कर्तव्य है।   


No comments:

Post a Comment