टीवी में दिखने वाली टीवी की दुनिया को क़रीब से देखा, एक चैनल के न्यूज़रूम का दीदार किया। कमरे में पहला कदम रखते ही नज़र दौड़ी सामने डेस्क पर रखे 100 कंप्यूटर सिस्टम्स की ओर, जिन पर काम करते लोग इतने व्यस्थ थे कि अपने साथ खड़े - बैठे लोगों की ओर देखने तक की फुरसत नहीं। एक मोहतरमा से बात हुई तो वो पगलाई सी झल्लाकर कुछ बोलीं। जो भी उन्होंने कहा वो यहाँ लिखना तो असम्भव है, मगर कोई बात नहीं। ठीक है मैडम हम आपकी फृस्त्रशन समझते हैं। चैंनलों में यही होता है। जो होता है, वो दिखता नहीं, लेकिन जो दिखता है वो कहीं ना कहीं घटता ज़रूर है।
एक सज्जन से कुछ दिन पहले मुलाक़ात हुई थी। उम्र में काफी बड़े हैं। पहली मीटिंग में ही नंबर एक्सचेंज हो गए। लगभग हर रोज़ बात भी होने लगी। एक दिन बातों बातों में वो अचानक बोले - "बीइंग अ सीनियर आई कांट बी राईट ऑल द टाइम। आई हैव सीनियर्स हू वर नेवर रेडी टू कॉन्फेस देयर फुलिशनेस।" आप सही थे सर। सीनियर हैं तो क्या ग़लती नहीं कर सकते? हैं तो आखिर इंसान ही।
ख़ैर अब मोहतरमा से क्या शिकायत करना। उनके भी अपने अनुभव हैं। पर एक बात अब तक समझ नहीं आयी कि बौखलाने की वजह क्या वो एक सवाल था या वो उनके अपने अनुभव ही हैं जो उन्हें अब तक कलपने पर मजबूर कर रहे हैं ? इसका जवाब पता नहीं किसके पास है लेकिन ईशवर से यही प्रार्थना है कि वो उनकी फृस्ट्रटेड आत्मा को शान्ति दे।
एक सज्जन से कुछ दिन पहले मुलाक़ात हुई थी। उम्र में काफी बड़े हैं। पहली मीटिंग में ही नंबर एक्सचेंज हो गए। लगभग हर रोज़ बात भी होने लगी। एक दिन बातों बातों में वो अचानक बोले - "बीइंग अ सीनियर आई कांट बी राईट ऑल द टाइम। आई हैव सीनियर्स हू वर नेवर रेडी टू कॉन्फेस देयर फुलिशनेस।" आप सही थे सर। सीनियर हैं तो क्या ग़लती नहीं कर सकते? हैं तो आखिर इंसान ही।
ख़ैर अब मोहतरमा से क्या शिकायत करना। उनके भी अपने अनुभव हैं। पर एक बात अब तक समझ नहीं आयी कि बौखलाने की वजह क्या वो एक सवाल था या वो उनके अपने अनुभव ही हैं जो उन्हें अब तक कलपने पर मजबूर कर रहे हैं ? इसका जवाब पता नहीं किसके पास है लेकिन ईशवर से यही प्रार्थना है कि वो उनकी फृस्ट्रटेड आत्मा को शान्ति दे।
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