चुनाव जीतने के लिए नेता आजकल तरह - तरह की रणनीतियाँ अपनाते हुए नज़र आते हैं। सबके अपने अलग - अलग तरीके हैं। कोई हिंदुत्व को बढ़ावा देना चाहता है, कोई सेक्युलर है, कोई बिजली - पानी की समस्या को दूर करना अपनी ज़िम्मेदारी बताता है, तो कोई ग़रीबी दूर करना चाहता है। हर कोई किसी एक मुद्दे को पकड़े वायदे करते नज़र आता है।
आज जो देश के प्रधानमंत्री हैं, उन्होंने भी दिन - रात अपनी पार्टी के लिए खूब प्रचार किया। आज जो नतीजा दिखाई दे रहा है, वो साफ़ ज़ाहिर करता है कि बीजेपी ने जीत हासिल करने के लिए कहीं कोई कसर नहीं छोड़ी। टीवी, रेडियो, अखबारों के द्वारा बहुत कुछ दिखाया, बताया और सुनाया गया, पर कुछ था जो रह गया। इस नतीजे के पीछे शायद एक हिस्सा और भी है। मेरे फ़ोन के कैमरे से ली गयी ये तस्वीर बहत कुछ कहती है। ज़रा गौर कीजियेगा।
ये एक लोकल ट्रेन के महिला डिब्बे की तस्वीर है। लिखे गए शब्द कुछ इस प्रकार हैं।
"वैसे तो सारे नेता भ्रष्ट हैं चाहे मोदी ही क्यों न हो। लेकिन जब सबको देख चुके तो एक बार मोदी को भी देखो। कम से कम हिंदुत्व तो बढ़ेगा। हिन्दुओं का संगठन भी बनेगा। हिन्दू धर्म का तूफ़ान तो आएगा।"
दो - तीन जगह कुछ और बातें भी लिखी थीं, जल्दी में उनकी तस्वीर तो न मिल सकी पर जो लिखा था वो मैंने नोट कर लिया। एक जगह इस प्रकार लिखा था।
"मोदी को वोट दो।
हिंदुत्व को वोट दो।
हिन्दू धर्म को वोट दो।
विकास को वोट दो।
हिन्दू जागो। "
दूसरी तरफ वाली खिड़की के पास निम्नलिखित वाक्य लिखा हुआ था।
"समस्त हिन्दू एकजुट हो जाओ और हिंदुसतान को वोट दो।"
कौन होगा वो शख़्स जिसने उस महिला डिब्बे को हिंदुत्व का डिब्बा बना दिया। जो भाषा लिखी गयी है, उससे तो यही प्रतीत होता है कि ये सारी बातें चुनाव होने से पहले ही लिखी गयी होंगी। ऊपर तस्वीर में गौर करने वाली एक बात और है कि किसी ने उस हिंदुत्व पर लिखे भाषण को मानो बहुत गुस्से में काट दिया है। सोचने वाली बात है कि आखिर ये क्रॉस का निशान किसने लगाया होगा?
पीएस - उस ट्रेन में जो भी लिखा था, वो परमानेंट मार्कर से लिखा था या नहीं, मुझे ज्ञात नहीं । अगर कोई तलाशी लेने जाए और ये सब कुछ वहाँ न मिले तो माफ़ कीजियेगा।
आज जो देश के प्रधानमंत्री हैं, उन्होंने भी दिन - रात अपनी पार्टी के लिए खूब प्रचार किया। आज जो नतीजा दिखाई दे रहा है, वो साफ़ ज़ाहिर करता है कि बीजेपी ने जीत हासिल करने के लिए कहीं कोई कसर नहीं छोड़ी। टीवी, रेडियो, अखबारों के द्वारा बहुत कुछ दिखाया, बताया और सुनाया गया, पर कुछ था जो रह गया। इस नतीजे के पीछे शायद एक हिस्सा और भी है। मेरे फ़ोन के कैमरे से ली गयी ये तस्वीर बहत कुछ कहती है। ज़रा गौर कीजियेगा।
ये एक लोकल ट्रेन के महिला डिब्बे की तस्वीर है। लिखे गए शब्द कुछ इस प्रकार हैं।
"वैसे तो सारे नेता भ्रष्ट हैं चाहे मोदी ही क्यों न हो। लेकिन जब सबको देख चुके तो एक बार मोदी को भी देखो। कम से कम हिंदुत्व तो बढ़ेगा। हिन्दुओं का संगठन भी बनेगा। हिन्दू धर्म का तूफ़ान तो आएगा।"
दो - तीन जगह कुछ और बातें भी लिखी थीं, जल्दी में उनकी तस्वीर तो न मिल सकी पर जो लिखा था वो मैंने नोट कर लिया। एक जगह इस प्रकार लिखा था।
"मोदी को वोट दो।
हिंदुत्व को वोट दो।
हिन्दू धर्म को वोट दो।
विकास को वोट दो।
हिन्दू जागो। "
दूसरी तरफ वाली खिड़की के पास निम्नलिखित वाक्य लिखा हुआ था।
"समस्त हिन्दू एकजुट हो जाओ और हिंदुसतान को वोट दो।"
कौन होगा वो शख़्स जिसने उस महिला डिब्बे को हिंदुत्व का डिब्बा बना दिया। जो भाषा लिखी गयी है, उससे तो यही प्रतीत होता है कि ये सारी बातें चुनाव होने से पहले ही लिखी गयी होंगी। ऊपर तस्वीर में गौर करने वाली एक बात और है कि किसी ने उस हिंदुत्व पर लिखे भाषण को मानो बहुत गुस्से में काट दिया है। सोचने वाली बात है कि आखिर ये क्रॉस का निशान किसने लगाया होगा?
पीएस - उस ट्रेन में जो भी लिखा था, वो परमानेंट मार्कर से लिखा था या नहीं, मुझे ज्ञात नहीं । अगर कोई तलाशी लेने जाए और ये सब कुछ वहाँ न मिले तो माफ़ कीजियेगा।

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