इस दुनिया में जन्म लेते ही हम हज़ारों रिश्तों से बंध जाते हैं। एक रिश्ता माँ से, एक पिता से, भाई और बहन से भी। साथ ही कई रिश्तेदार - मामा, चाचा, ताऊ, बुआ और भी न जाने कौन कौन। इतने सारे रिश्ते कि नए रिश्ते बनाने की ज़रुरत ही नहीं।
पर फिर भी एक रिश्ता है जो हम अपनी मर्ज़ी से बनाते हैं। हाँलाकि ख़ुदा ने ही वो रिश्ता हमें नवाज़ा है, पर फिर भी जन्म के साथ हम उससे नहीं बंधते। वो रिश्ता है दोस्ती का। वक़्त बीतता जाता है और जैसे-जैसे हम ज़िन्दगी में आगे बढ़ते हैं, दोस्त बनते जाते हैं और रिश्तों का आंकड़ा बढ़ता चला जाता है।
आजकल जो एक रिश्ता फैशन में है वो है "बातों का रिश्ता" । फेसबुक और कई सोशल नेटवर्किंग साइट्स ने (व्हाट्सएप्प को न भूलते हुए) लोगों को ये रिश्ता बनाने का मौका दिया। किसी को भी फेसबुक पर फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजिए, और हज़ारों मील दूर बैठे शख़्स से आप दिन रात बेइन्तहां बातें कर सकते हैं। अपने मोबाइल फ़ोन में एक नंबर सेव कीजिये, उसे इस्तेमाल करने वाला शख़्स अगर व्हाट्सएप्प पर है तो आप उससे खूब बातें कर सकते हैं। एक दूर बैठा शख़्स जिससे आप कभी कहीं मिले होंगे और उस मुलाक़ात में नंबर एक्सचेंज हुआ होगा। अचानक वो आपकी व्हाट्सएप्प की लिस्ट में दिखने लगा होगा, और शायद आप उसकी प्रोफाइल और स्टेटस पर नज़र रखने लगेंगे।
सहसा एक दिन आपको उसका स्टेटस भा जाता है और "नाइस स्टेटस" जैसा मैसेज लिखकर तारीफ़ करते हुए आपको उससे बात करने का मौक़ा मिल जाता है। फिर इंट्रोडक्शन होता है। याद किया जाता है कि हम कब और कहाँ मिले थे। उसके बाद हलकी-फुल्की बातें शुरू होती हैं। और यही सिलसिला जारी रहता है। कहने को आप उसे दोस्त कह सकते हैं, पर यूँही बिना वजह किसी पर ऐतबार कर लेना ज़रा मुश्किल हो सकता है। इसलिए आप इसे बातों का रिश्ता ही मान लीजिये।
ख़ैर, जो भी हो ये रिश्ता है बड़ा ही प्यारा। इसी बात पर राजेश खन्ना की फिल्म "आनंद" का एक डॉयलॉग याद अ गया। "बाबुमुशायी! ज़िन्दगी में कोई इंसान अच्छा लगा, उसे रोक कर दो मिनट बात करो तो दिल को सुकून मिलता है"।
इसी तरह एक शख़्स जिससे कभी मुलकात हुई, नंबर एक्सचेंज हुआ; वो व्हाट्सएप्प पर मिला और उससे ढेर सारी बातों का सिलसिला शुरू हो गया। उसकी हर बात रास आने लगी, और ये उम्मीद होने लगी कि ये सिलसिला कभी ख़त्म न हो। वैसे तो आमने-सामने होकर भी बातें हो सकती हैं, पर तब शायद रिश्ता दोस्ती का हो जाए। फिलहाल तो ये बातों का रिश्ता ही रंगीन है, जिसकी अहमियत और ज़िन्दगी आने वाला वक़्त ही तय करेगा। तब तक आप बातें करते रहिये।
पर फिर भी एक रिश्ता है जो हम अपनी मर्ज़ी से बनाते हैं। हाँलाकि ख़ुदा ने ही वो रिश्ता हमें नवाज़ा है, पर फिर भी जन्म के साथ हम उससे नहीं बंधते। वो रिश्ता है दोस्ती का। वक़्त बीतता जाता है और जैसे-जैसे हम ज़िन्दगी में आगे बढ़ते हैं, दोस्त बनते जाते हैं और रिश्तों का आंकड़ा बढ़ता चला जाता है।
आजकल जो एक रिश्ता फैशन में है वो है "बातों का रिश्ता" । फेसबुक और कई सोशल नेटवर्किंग साइट्स ने (व्हाट्सएप्प को न भूलते हुए) लोगों को ये रिश्ता बनाने का मौका दिया। किसी को भी फेसबुक पर फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजिए, और हज़ारों मील दूर बैठे शख़्स से आप दिन रात बेइन्तहां बातें कर सकते हैं। अपने मोबाइल फ़ोन में एक नंबर सेव कीजिये, उसे इस्तेमाल करने वाला शख़्स अगर व्हाट्सएप्प पर है तो आप उससे खूब बातें कर सकते हैं। एक दूर बैठा शख़्स जिससे आप कभी कहीं मिले होंगे और उस मुलाक़ात में नंबर एक्सचेंज हुआ होगा। अचानक वो आपकी व्हाट्सएप्प की लिस्ट में दिखने लगा होगा, और शायद आप उसकी प्रोफाइल और स्टेटस पर नज़र रखने लगेंगे।
सहसा एक दिन आपको उसका स्टेटस भा जाता है और "नाइस स्टेटस" जैसा मैसेज लिखकर तारीफ़ करते हुए आपको उससे बात करने का मौक़ा मिल जाता है। फिर इंट्रोडक्शन होता है। याद किया जाता है कि हम कब और कहाँ मिले थे। उसके बाद हलकी-फुल्की बातें शुरू होती हैं। और यही सिलसिला जारी रहता है। कहने को आप उसे दोस्त कह सकते हैं, पर यूँही बिना वजह किसी पर ऐतबार कर लेना ज़रा मुश्किल हो सकता है। इसलिए आप इसे बातों का रिश्ता ही मान लीजिये।
ख़ैर, जो भी हो ये रिश्ता है बड़ा ही प्यारा। इसी बात पर राजेश खन्ना की फिल्म "आनंद" का एक डॉयलॉग याद अ गया। "बाबुमुशायी! ज़िन्दगी में कोई इंसान अच्छा लगा, उसे रोक कर दो मिनट बात करो तो दिल को सुकून मिलता है"।
इसी तरह एक शख़्स जिससे कभी मुलकात हुई, नंबर एक्सचेंज हुआ; वो व्हाट्सएप्प पर मिला और उससे ढेर सारी बातों का सिलसिला शुरू हो गया। उसकी हर बात रास आने लगी, और ये उम्मीद होने लगी कि ये सिलसिला कभी ख़त्म न हो। वैसे तो आमने-सामने होकर भी बातें हो सकती हैं, पर तब शायद रिश्ता दोस्ती का हो जाए। फिलहाल तो ये बातों का रिश्ता ही रंगीन है, जिसकी अहमियत और ज़िन्दगी आने वाला वक़्त ही तय करेगा। तब तक आप बातें करते रहिये।
SHABDON KA CHAYAN BEHATREEN HAI. AISE HI LIKHEE RAHO. GOD BLESS YOU!
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