Wednesday, 9 September 2015

मुबारक़ हो, आप मर्द हैं

जी हाँ, आप, जो कल ऑटो में तनकर बैठे हुए थे, आप ही से कहना चाह रही हूँ मैं। नोएडा सुरक्षित क्षेत्र नहीं है, ये शायद आपको तब मालूम होता जब आपकी अपनी कोई बहन या बेटी होती जिसे हर दिन नौकरी करने यहाँ आना पड़ता।

माना कि आप उस ऑटो वाले को उतने ही पैसे दे रहे थे जितने मैं भी देने की हैसियत रखती हूँ, मग़र शायद आप ये समझ सकते थे कि किसी भी इलाके में जैसे-जैसे अँधेरा बढ़ता है, एक महिला असुरक्षित महसूस करने लगती है। ख़ैर, आप क्यों इतना कष्ट करेंगे, आप महिला थोड़ी ना हैं। वैसे आजकल तो ज़माना ऐसा है कि महिला भी महिला की दुशमन हो चली है। पर अब क्या ही कहें। छोड़िये।

बड़ी आसानी से आपने कह दिया कि मैं आगे नहीं बैठूंगा। मैं ही बेवक़ूफ़ थी जो समझ रही थी कि शायद आप में 'कर्टसी' नाम की कोई चीज़ होगी। आफ्टर आल, आप तो मर्द हैं जो औरत को कुछ नहीं समझते या कुछ समझते भी हैं तो बस पाँव की जूती या हो सकता है उससे भी बत्तर कुछ और। आप ही जानें।

पर हार तो मैंने भी नहीं मानी। तेहा में उस ऑटो को छोड़कर आगे बढ़ गई। क़िस्मत अच्छी थी या बुरी मालूम नहीं, पर दस मिनट बाद वही ऑटो खाली होकर मेरे सामने आ खड़ा हुआ, और आप अब भी वहीँ बैठे हुए थे। सहसा ऑटो वाले ने पूछा-" मैडम, मोहन नगर?"

मैंने कहा- "हाँ भैया।"

मैं ऑटो में चढ़ी और सीना तानकर आपके ही बगल में बैठ गई। गुस्सा और हँसी  दोनों मेरे चेहरे पर साफ़ झलक रहे थे। आपकी भी शक्ल देखने लायक थी। दिल कर रहा था आपका एक फोटो ले लूँ और सोशल मीडिया पर वायरल कर दूँ। पर क्या फायदा, आप जैसी शख्सियत को पॉपुलर करने का?

मुझे बस इतना ही कहना है- "न जाने किस बात पर गुमान करने वाले, मुबारक़ हो, आप मर्द हैं।"

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